मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

मंगलवार, दिसंबर 13, 2011

बारिश

अब तो भीगने को है
सारा जहाँ
जाने क्यों थमते नहीं
तुम्हारे आँसू

जाने कौन-सी
पुरानी टीस है
जो बह निकली है
तुम्हारी आँखों से

दोस्तों से भरी है
तुम्हारी दुनिया
अपना दर्द
बाँटते क्यों नहीं

जाने क्यों
समझ नहीं आती
दुनिया को
तुम्हारी पीड़ा

शायद
कहीं नहीं समझी जाती
आँसुओं की भाषा
धरती और आकाश के बीच.

लंदन में इन दिनों लगातार बारिश हो रही है, आसमान में धुंध सी छाई है और सारा माहौल जैसे उदास है... बादलों का दर्द बयान करती मेरी एक कविता...