अब तो भीगने को है
सारा जहाँ
जाने क्यों थमते नहीं
तुम्हारे आँसू
जाने कौन-सी
पुरानी टीस है
जो बह निकली है
तुम्हारी आँखों से
दोस्तों से भरी है
तुम्हारी दुनिया
अपना दर्द
बाँटते क्यों नहीं
जाने क्यों
समझ नहीं आती
दुनिया को
तुम्हारी पीड़ा
शायद
कहीं नहीं समझी जाती
आँसुओं की भाषा
धरती और आकाश के बीच.
लंदन में इन दिनों लगातार बारिश हो रही है, आसमान में धुंध सी छाई है और सारा माहौल जैसे उदास है... बादलों का दर्द बयान करती मेरी एक कविता...
