तकनीक के इस ज़माने में कविताएँ भी मोबाइल के इनबॉक्स तक पहुँचने लगी हैं... एक दोस्त ने मैसेज के ज़रिये भेजी ये ख़ूबसूरत कविता... सोचा आपसे भी बाँट लूँ...
जब छोटे थे
तो
बड़े होने की बड़ी तमन्ना थी...
लेकिन
अब पता चला...
कि अधूरे अहसास
और...
टूटे सपने से बेहतर
अधूरा होमवर्क
और
टूटे खिलौने थे...
मेरे बारे में
- नीरज श्रीवास्तव
- लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
- अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.
रविवार, अक्टूबर 24, 2010
रविवार, अक्टूबर 03, 2010
मैं हैरान हूँ...
हैरान हूँ कुछ दोस्तों के कई चेहरे देखकर
हैरान हूँ रिश्तों को भुनाने का हुनर देखकर
हैरान हूँ नये प्रेम गढ़ने के लिए टूटे रिश्तों का इस्तेमाल देखकर
सोचता हूँ रंग बदलने में ये ज़्यादा माहिर हैं
या अपना असली रंग छुपाने में
शायद इनके पास हर मौके के लिए एक ख़ास चेहरा है
जिसे वो अपने हक में इस्तेमाल करते हैं
लेकिन मैं हैरान हूँ...
चेहरों के इस्तेमाल में इनकी महारत देखकर.
हैरान हूँ रिश्तों को भुनाने का हुनर देखकर
हैरान हूँ नये प्रेम गढ़ने के लिए टूटे रिश्तों का इस्तेमाल देखकर
सोचता हूँ रंग बदलने में ये ज़्यादा माहिर हैं
या अपना असली रंग छुपाने में
शायद इनके पास हर मौके के लिए एक ख़ास चेहरा है
जिसे वो अपने हक में इस्तेमाल करते हैं
लेकिन मैं हैरान हूँ...
चेहरों के इस्तेमाल में इनकी महारत देखकर.
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