तकनीक के इस ज़माने में कविताएँ भी मोबाइल के इनबॉक्स तक पहुँचने लगी हैं... एक दोस्त ने मैसेज के ज़रिये भेजी ये ख़ूबसूरत कविता... सोचा आपसे भी बाँट लूँ...
जब छोटे थे
तो
बड़े होने की बड़ी तमन्ना थी...
लेकिन
अब पता चला...
कि अधूरे अहसास
और...
टूटे सपने से बेहतर
अधूरा होमवर्क
और
टूटे खिलौने थे...

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