मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

मंगलवार, मार्च 23, 2010

रिश्ते...!

बेटे की सलामती के लिए

हलषष्ठी का व्रत रखती है माँ

हर दिन कामयाबी के लिए

दुआ करते हैं पिता

लंबी उम्र के लिए

निर्जला कर रही है पत्नी

और

भाईयों की नज़र में

बाकी है इज़्जत

सोचता हूँ

कितना ज़रूरी हैं रिश्ते

अपनी अहमियत के लिए

वरना तो चीजों की तरह

इस्तेमाल होता

आदमी.

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