बेटे की सलामती के लिए
हलषष्ठी का व्रत रखती है माँ
हर दिन कामयाबी के लिए
दुआ करते हैं पिता
लंबी उम्र के लिए
निर्जला कर रही है पत्नी
और
भाईयों की नज़र में
बाकी है इज़्जत
सोचता हूँ
कितना ज़रूरी हैं रिश्ते
अपनी अहमियत के लिए
वरना तो चीजों की तरह
इस्तेमाल होता
आदमी.


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