लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.
बचपन से पढ़ते आये हैं...
खुशी बाँटने से बढ़ती है...
फ़िर जाने क्यों...
लोग छुपाना चाहते हैं अपनी ख़ुशियाँ...
शायद नहीं जानते लोग...
छुपाई नहीं जा सकती खुशी भी...
ग़म की तरह...
नीरज जी बस इतनी ही पोस्ट लगा सारी रात निकल सकती है पर.... आपकी अगली पोस्ट का इंतजार कर रहे है
जवाब देंहटाएंsahi hai sir ji
जवाब देंहटाएंखुशीदेखकर लोग जलते है औंग गम बांटने वाला या समझने वाला मीलना मुश्किल है, इस लिये लोग गम औंर छुपाना ही पसंद करते हैं
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