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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

गुरुवार, नवंबर 25, 2010

नहीं छिपाई जा सकती खुशी

बचपन से पढ़ते आये हैं...
खुशी बाँटने से बढ़ती है...
फ़िर जाने क्यों...
लोग छुपाना चाहते हैं अपनी ख़ुशियाँ...
शायद नहीं जानते लोग...
छुपाई नहीं जा सकती खुशी भी...
ग़म की तरह...

3 टिप्‍पणियां:

  1. नीरज जी बस इतनी ही पोस्ट लगा सारी रात निकल सकती है पर.... आपकी अगली पोस्ट का इंतजार कर रहे है

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  2. खुशीदेखकर लोग जलते है औंग गम बांटने वाला या समझने वाला मीलना मुश्किल है, इस लिये लोग गम औंर छुपाना ही पसंद करते हैं

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