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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

बुधवार, मार्च 10, 2010

महिला सशक्तिकरण से चीयर लीडर्स का क्या रिश्ता है शिवराज जी...?

क्रिकेट मैच के दौरान चौके-छक्कों की बरसात के बीच दर्शकों को लुभाने वाली चीयर लीडर्स को मध्यप्रदेश में इंट्री नहीं मिलेगी. पढ़कर चौकिये मत, ये किसी उत्साही संगठन की धमकी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान है. दुनिया के खेल मैदानों में दर्शकों का मनोरंजन करने वाली चीयर गर्ल्स के डांस में शिवराज को नारियों का अपमान दिखाई देता है. महिला दिवस पर महिला हेल्प लाइन की टोल फ्री सेवा 1091 को शुरु करने के साथ ही शिवराज ने ये घोषणा कर डाली कि मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले क्रिकेट के किसी भी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मैच के दौरान चीयर्स गल्र्स को नाचने नहीं दिया जाएगा. शिवराज जी, आपके प्रदेश में पहले भी आईपीएल के आयोजकों ने मैच आयोजित कराने में कोई रुचि नहीं ली, और अब आपकी चेतावनी के बाद तो प्रदेश के क्रिकेटप्रेमियों की रही-सही उम्मीद भी जाती रही. हम इतना ज़रूर कहना चाहेंगे कि महिला शक्ति के सम्मान के लिए आपकी घोषणा पर किसी को ऐतराज नहीं हो सकता, लेकिन शिवराज जी जिस राज्य के आप मुखिया हैं, वही प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार के मामले में शर्मनाक स्थिति में खड़ा है. क्या उन अत्याचारों को रोकने की ठोस पहल नहीं की जानी चाहिए? क्या पुलिस थानों में बैठे सिपाहियों से लेकर अफसरों तक को महिलाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील और ज़िम्मेदार बनाने की पहल नहीं की जानी चाहिए? महिलाओं के उत्थान के लिए बनाई योजनाओं में बंदरबाँट बंद नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि भोपाल में करोड़ों रुपये के साथ पकड़ी गई आईएएस ऑफिसर मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग में ही एक बड़ी अधिकारी थी. ज़ाहिर है महिलाओं के उत्थान के लिए आने वाले सरकारी पैसे से अफसर महोदया का ही उत्थान हुआ. इसलिए शिवराज जी, यदि लगाम कसनी है तो अपने भ्रष्ट कारिंदों पर कसिये. अपने उन रंगीन मिज़ाज मंत्रियों को समझाइश दीजिये, जो सरकारी पैसा खर्च कर सरेआम अश्लील नाच कराते हैं. क्रिकेट के मैदान में नाचने वाली लड़कियों पर पाबंदी के ऐलान से संस्कृति रक्षक होने का तमगा भले ही आप हासिल कर लें, लेकिन उन महिलाओं का कोई भला नहीं होगा, जिन्हें आप अपनी बहनें कहते हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि अगली बार खुद को महिलाओं का भाई कहते हुए आपको इस ज़िम्मेदारी का अहसास भी रहेगा.

2 टिप्‍पणियां:

  1. dear neeraj, tum shayad bhul rahe ho ki politicians ka kam sirf politics karna hai, asli muddo se logo ko bhatkane ke liye hi aisa kiya jata hai.

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  2. चीयर लीडर्स का रिश्ता तो शिवराज ही बतायेंगे, लेकिन मध्यप्रदेश में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार इस पाबंदी से कम हों तो पूरे देश में ही चीयर लीडर्स का प्रदर्शन रोक देना चाहिए। सब पॉलिटिक्स है.

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