मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

रविवार, अक्टूबर 03, 2010

मैं हैरान हूँ...

हैरान हूँ कुछ दोस्तों के कई चेहरे देखकर
हैरान हूँ रिश्तों को भुनाने का हुनर देखकर
हैरान हूँ नये प्रेम गढ़ने के लिए टूटे रिश्तों का इस्तेमाल देखकर
सोचता हूँ रंग बदलने में ये ज़्यादा माहिर हैं
या अपना असली रंग छुपाने में
शायद इनके पास हर मौके के लिए एक ख़ास चेहरा है
जिसे वो अपने हक में इस्तेमाल करते हैं
लेकिन मैं हैरान हूँ...
चेहरों के इस्तेमाल में इनकी महारत देखकर.

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