
मुंबई में आतंकी साजिश का शिकार हुए लोग तो चले गये... लेकिन उनके नाम पर अगले कुछ दिनों में बहुत कुछ देखने को मिलेगा... सड़क पर मार्च होगा, मोमबत्तियाँ जलाईं जायेंगी, कहीं सभा होगी, फिर एक दिन श्रद्धांजलि के नाम पर कोई म्यूज़िक या वीडियो लांच करने का ऐलान करेगा... हो सकता है एकाध फिल्म भी बन जाये, दहशत को भुनाने के लिए... बस यहीं तक जाती है राह हमारे दिखावे की... और सब-कुछ बिसरा दिया जाता है... दिल्ली हो, जयपुर, अहमदाबाद या मुंबई... जहाँ खून गिरा... बेहद कम वक्त बीतने के बाद वहीं शुरु हो जाता है रंगीनियों का तमाशा... क्या इतने सिमट गये हैं हमारे दायरे... कि खुद से आगे न नज़रे पहुँचती हैं... और न संवेदना !

नीरज,आईना दिखा रहे हो...ज़रुरी है...मौत के बाद होने वाले हमेशा से एक लय राग में चलने वाले इन तमाशों को खत्म करने के लिये।
जवाब देंहटाएं