
जब स्कूल में पढ़ता था, तो हर वक्त शरारत सवार रहती थी... लेकिन कभी-कभी गंभीर भी हो जाया करता था, उस दिन या कई दिनों तक कोई शरारत नहीं... दोस्त पूछा करते थे कि अचानक क्या हो गया... हालाँकि उस वक्त तो मैने किसी से कुछ नहीं कहा... लेकिन आज अचानक मन हुआ कि खोल दूँ राज अपनी उदासी का...
जब तन्हाई में
गूँजे कोई आवाज़
बंद आँखें देखने लगें
कोई तस्वीर
कोई वजूद छाया-सा लगे
दिलों-दिमाग पर
और शिद्दत से महसूस हो
अपने दिल की धड़कन…
उस वक्त जो गुदगुदाता है
शायद
उसी अहसास को कहते हैं
प्रेम...!
गूँजे कोई आवाज़
बंद आँखें देखने लगें
कोई तस्वीर
कोई वजूद छाया-सा लगे
दिलों-दिमाग पर
और शिद्दत से महसूस हो
अपने दिल की धड़कन…
उस वक्त जो गुदगुदाता है
शायद
उसी अहसास को कहते हैं
प्रेम...!

स्कूल में ही प्रेमानुभव होने लगे थे !
जवाब देंहटाएंतब तो हमलोगों को खूब अच्छी कविताएँ पढ़ने को मिलेंगीं।
अरे भैया, ये सारे लक्षण प्रेम होने पर ही प्रकट होते हैं।
शुभकामनाएँ।