मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

गुरुवार, जनवरी 14, 2010

नया साल...!


बढ़ गया आधी रात के बाद
एक और सामान
रद्दी की टोकरी में पड़े
दूसरे सामानों की तरह
लोगों ने उसे मिलेनियम कचरा कहा
और टाँग दिया
घर के दरवाज़े पर
अब कचरा सड़ रहा है
सड़ांध पहुँच चुकी है नथुनों के भीतर
पर लोग बेहद खुश हैं
उसे मिलेनियम गंध मानकर...!

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