मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

शनिवार, सितंबर 13, 2008

बहुत मासूम होते हैं शब्द
जब इन्हें लिखा जाता है ब्लैकबोर्ड पर
नोटबुक तक आते-आते...
इनके साथ ही उतर आता है शातिरपन
अजीब बात है...
जब शहर की दीवारों पर लिखे जाते हैं यही शब्द...
तो कितने भयानक हो जाते हैं...... !

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