मेरे बारे में
- नीरज श्रीवास्तव
- लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
- अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.
रविवार, सितंबर 28, 2008
हम तो हनुमान हैं......!
सतयुग में राम के हर काज को संवारने वाले हनुमान के बारे में तो सभी जानते हैं... लेकिन कलियुग में भी ऐसे कई लोग हैं... जो हनुमान बन जाते हैं... इन हनुमानों के गुण अपने राम के लिए समर्पण में छुपे हैं... फर्क बस इतना है कि त्रेता के हनुमान एक ही राम के लिए समर्पित रहे... और कलियुग के हनुमान को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मर्यादा पुरुषोत्तम कौन है... जिसका राज्याभिषेक हुआ... वही उनका राम है... और वे उसके हनुमान... जब तक कुर्सी है... तो चरण सेवक हनुमान हैं... और वनवास हुआ तो गद्दी पर बैठने वाला उनका नया राम है... कलियुग के ये हनुमान सत्ता संभालने वाले हर राम के प्रिय हैं... उसके चहेते हैं... और तारीफ से लेकर तरक्की तक के हकदार हैं... ऐसे हनुमान हर वक्त गद्दीनशीन राम की सेवा में हैं... उसकी जी-हुजूरी के लिए तैयार है... और सत्ता जाने के बाद उसकी खाल खींचने में भी माहिर हैं... ज़रा गौर से देखिये... क्या दिख रहा है कोई कलियुगी हनुमान आपके आस-पास?
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नीरज,पहली पोस्ट है आपकी,लेकिन खरी खरी...अच्छा लगा भाई...हम भी कुर्सी से बंधे हनुमानों से परेशान हैं...लेकिन कलयुग में इन हनुमानों का ही चालीसा चलता है....क्या किया जाये।
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