मेरे बारे में

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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

सोमवार, सितंबर 29, 2008

मेरा सपना !

भीड़ से बचने की चाहत लिये
अपनी अलग दुनिया
बस गई है सपने में...

हर रात उतरता है सपना
बिस्तर के सिराहने
और सुबह तक गुदगुदाता है
सब-कुछ सुहाना होने के अहसास से

अगली सुबह
फिर घुस आती है भीड़
अपनी गति से
सब-कुछ रौंदते हुए
और
नींद के साथ टूट जाता है
मेरा सपना भी...!

1 टिप्पणी:

  1. सपने ही तो है जहॉ कुछ अपना है,
    इन सपनों के साथ ही खत्म हो जाती है जिन्दगी,
    खुशकिस्मत है जिन्हे नसीब होती है ये हक़ीकत भी....

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