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लंदन (यूके) - हैदराबाद, भोपाल (भारत), मध्य प्रदेश, India
अपनी ज़िंदगी को लेकर सपने नहीं देखता... या यूँ कहें कि देखना बंद कर दिया... अपने आस-पास की तमाम चीजों के लिए संजीदा हूँ... इसलिए ख़रा और कभी-कभी कड़वा बोलता हूँ... जो दोस्त हैं कड़वाहट पचा जाते हैं, नहीं तो नये दुश्मन खड़े हो जाते हैं.

सोमवार, सितंबर 29, 2008

पहचान !

आज कविता नहीं
कहानी सुनाता हूँ तुम्हें...

ये कहानी है
हम जैसे एक आदमी की
जो ईसाई नहीं था
क्योंकि तब इस देश में ये धर्म नहीं था
वो सिख भी नहीं था
क्योंकि तब ये धर्म जन्मा नहीं था
और
हिंदू या मुसलमान होना
उसे पसंद नहीं था

मज़हब के आइने से दुनिया देखने वालों
सोचकर बताओ ज़रा
इस आदमी की पहचान कैसे होगी...?

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